साहित्य

बचाओ यह जीवन आधार

हेमा जालान’कनक’

पृथ्वी दिवस पर जनमानस से हरियाली की सुरक्षा के लिए सचेत करते हुए करूँ पुकार

धरती माँ की गोद में, जीवन का विस्तार ।
हरियाली की छाँव में, मिलता जीवन सार ।।

मत काटो तुम पेड़ को, होती सृष्टि तबाह ।
सब खगोल शात्री करें, नित तुमको आगाह ।।

जल थल नभ सब रो रहे, सुनो प्रकृति की बात ।
मोह-पाश में भूलकर, मत कर ऐसा घात ।।

जल नदियाँ सब सूखते, होता स्तर कम नीर ।
होड़ आधुनिकता की मनुज, सदा बढ़ाती पीर ।।

वायु प्रदूषण बढ़ रहा, बढ़े अनेकों रोग ।
बचने रोगों हेतु तुम, नित्य करो अब योग ।।

तपती धरती कह रही, छोड़ो यह उन्माद।
वरना होगा अंत में, केवल ही अवसाद।।

करो प्राकृतिक संपदा, की मिल रक्षा आज ।
वृक्ष लगाओ एक सब, कर नूतन आगाज ।।

जियो संयमित जिंदगी, संजो लो हर बूँद ।
मत बैठो तुम आज यूँ, अपनी आँखें मूँद ।।

हेमा जालान’कनक’ मुंगेर

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