
पृथ्वी दिवस पर जनमानस से हरियाली की सुरक्षा के लिए सचेत करते हुए करूँ पुकार
धरती माँ की गोद में, जीवन का विस्तार ।
हरियाली की छाँव में, मिलता जीवन सार ।।
मत काटो तुम पेड़ को, होती सृष्टि तबाह ।
सब खगोल शात्री करें, नित तुमको आगाह ।।
जल थल नभ सब रो रहे, सुनो प्रकृति की बात ।
मोह-पाश में भूलकर, मत कर ऐसा घात ।।
जल नदियाँ सब सूखते, होता स्तर कम नीर ।
होड़ आधुनिकता की मनुज, सदा बढ़ाती पीर ।।
वायु प्रदूषण बढ़ रहा, बढ़े अनेकों रोग ।
बचने रोगों हेतु तुम, नित्य करो अब योग ।।
तपती धरती कह रही, छोड़ो यह उन्माद।
वरना होगा अंत में, केवल ही अवसाद।।
करो प्राकृतिक संपदा, की मिल रक्षा आज ।
वृक्ष लगाओ एक सब, कर नूतन आगाज ।।
जियो संयमित जिंदगी, संजो लो हर बूँद ।
मत बैठो तुम आज यूँ, अपनी आँखें मूँद ।।
हेमा जालान’कनक’ मुंगेर




