साहित्य

जीत का जश्न मनाएगा

जनकवि डा. नरेश कुमार 'सागर'

परिवार का बच्चों पर, पड़ने लगा दबाव है।
पड़ोसी को हराने का, सर पर चढ़ा शबाब है।।
अंकों की गिनती के आगे, कुछ भी सुझाई नहीं देता।
कम उम्र में बढ़ता बस्ता ,कुछ भी दिखाई नहीं देता ।।

हम अपनी जिम्मेदारी में, बच्चों से मिलना भूल गए ।
एक ही घर में रहते हैं पर, रिश्तों की भाषा भूल गए।।
घर से कालेज फिर कालेज से, ट्यूशन जाना है।
फिर आकर घर दोनों जगह का, होमवर्क निबटाना है।।

ऊपर से मम्मी – पापा का, एक नया फरमान हुआ।
जिसको सुनकर बच्चे का मन, देखो कैसे बेजान हुआ।।
मोबाइल और टेलीविजन ,जब तक नहीं चलाओगे ।
पड़ोसी के बच्चों से अच्छे ,जब तक नम्बर ना लाओगे ।।

खेल – कूद को उम्र पड़ी है ,केवल तुमको पढ़ना है।
इस दुनिया में सबसे आगे, बेटा तुम्हें निकलना है ।।
जीत- हार की बातों को , सभी सुनाना भूल गए ।
थोड़ा कम नम्बर लाने पर , गले लगाना भूल गए ।।

प्रेशर – प्रेशर और प्रेशर , हर रोज प्रेशर बढ़ता है ।
शिक्षा में सर्वोच्च अंक का ,नशा सभी को चढ़ता है।।
माना आगे बढ़ जाना ही , श्रेष्ठ विजेता होता है।
हार के आगे बढ़ जाना, और भी काबिल होता है।।

ज्यादा पढ़ लिख जाने से ही, ज्ञान सबाया गर होता।
संत कबीर, रैदास और नानक का, नाम नहीं होता।।
आओ तुमको पढ़ें लिखे कम, उनकी सैर कराता हूं ।
शिक्षा से भी आगे बहुत है, ये तुमको समझाता हूं ।।

रामानुज, एडिशन, माइकल, आइंस्टीन और फैराडे ।
स्टीव जॉब्स, हेनरी फोर्ड , फ्रैंकलिन, गोर्की ने गाड़े झंडे।।
तेंदुलकर,विराट कोहली,धोनी, और देखो मैरी कोम को।
अम्बानी, गौतम अडानी, और देखो अक्षय कुमार को ।।

करिश्मा, रणवीर कपूर, सलमान खान के वो डोले ।
आलिया भट्ट,कंगना रनौत, और काजोल जब लव खोले।।
सबकी ही पढ़ाई कम थी , लेकिन आगे निकल गए ।
देखा – देखी लेकिन हम सब , सोच पुरानी बदल गए।।

सम्राट अशोक जीतकर भी, कलिंग युद्ध जब हार गए ।
सम्राट से वो बने महान और ,बुद्ध शरण मन तार गए।।
हार स्थाई नहीं होती , यार सभी ये जान लो।
हार को एक नई चुनौती, अपनी तुम मान लो।।

आत्महत्या किसी भी ,बात का तो हल नहीं ।
तू अगर हारे नहीं तो ,तेरे जैसा कहीं बल नहीं ।।
सत्तरह बार हार कर भी गौरी, कभी हारा नही ।
ये हकीकत है कोई , बेजान नया पहाड़ा नहीं ।।

मत करो आत्महत्या ,जीवन एक संग्राम है।
जो लड़ा जीतना यहां पर, उसका उतना नाम है।।
खाओ सपथ तुम कभी, बच्चों को नहीं लताडोगे ।
पड़ोसी से चिढ़कर तुम अपने,ना रीत नयी निकालोगे ।।

जिंदगी की हार को, जिसने भी बदला जीत में।
नाम उसका ही जुड़ा है, क्रान्ति के हर गीत में।।
मेहनत कर किसान बनकर, सब अच्छा हो जाएगा।
आज नहीं तो कल ‘सागर’ , जीत का जश्न मनाएगा।।
………..
जनकवि डा. नरेश कुमार ‘सागर’
गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज
9897907490

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