
धरा पर इतना बोझ ना डालो
पृथ्वी दिवस पर सौगंध उठा लो!!
प्रकृति का सौंदर्य है हरियाली
बाग और वृक्ष को ना तुम उजाड़ो!!
धरा संपन्न है प्रकृति ही जीवन
पेड़ लगाकर धरती को बचा लो!!
पेड़ से विहीन करो ना धरती को
भूस्खलन से धरा को बचा लो!!
प्रकृति बाग पेड़ पौधे सब
धरा को पोषित है करते,
प्रकृति वन्य जीवन आधारित,
जीव जंतु को बचा लो!!
प्रकृति को असंतुलन से बचा लो
संतुलन अगर नहीं रहा तो,
धरा पर, प्राकृतिक आपदा आएगी
कभी पड़ेगा अकाल सुखा
पृथ्वी को बाढ़ से बचा लो!!
प्रकृति से मिलता है जीवन
और वनस्पति वन उपवन!!
आओ लगाकर पेड़ धरा पर
प्रकृति सौंदर्य बढ़ा लो!!
विकास के नाम पर वृक्ष पहाड़ को
ऐसे तुम ना काटो,
धरती माँ पुकार रही है
मुझे नष्ट होने से बचा लो..!!
स्वरचित- राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




