साहित्य

चीलर सफेदपोश बना रहता है (हास्य-व्यंग्य)

जयचन्द प्रजापति 'जय'

चीलर कपड़ों के अंदर पाये जाते हैं। खासकर जो सबसे अंदर पहने जाते हैं। रक्तचूसक परजीवी होता है। सफेद दिखाई देता है। देश में पाये जाने वाले नेताओं की पोशाक की तरह श्वेत वर्ण में होते हैं। चीलर लाल रक्त को चूसकर आदमी को कमजोर करता है। रक्त चूसकर मोटा तगड़ा हो जाता है लेकिन वह चीलर सफेदपोश बना रहता है।

गंदे वस्त्रों में दबंगई से रहता हैं। इनका पूरा कुनबा इस कार्य में सहयोग करता है। चीलर ग्रस्त व्यक्ति परेशान सा रहता है। एक जगह खुजलाकर खुजलाहट ठीक करता है तो दूसरी जगह की खुजलाहट शुरू हो जाती है। ये चौबीसों घंटे सक्रिय रहते हैं।

हमारे देश के अंदर भी चीलर प्रवृत्ति के लोग अंत:तह में रहते हैं। बिल्कुल सादगी परस्त। देश के अंदरूनी भाग को चीलर की तरह कमजोर करते हैं। इस तरह के प्रवृत्ति में उनके कुनबे के साथ अन्य सहयोगी घटक दल भी इस कार्य में अपनी सुविधा के अनुसार देश के अंदरूनी भागों को कमजोर करने में लगे रहते हैं।

इस तरह के चीलरों का दमन करना आसान नहीं है। इनकी जड़ें गहरी होती हैं। इनको जड़ से उखाड़ना बेहद मेहनत का काम है। इनको खत्म किया जा सकता है। बेहद सख्ती अपनाना पड़ेगा। गरम पानी में उक्त कपड़े को कुछ समय तक रखा जाये तो समूल नष्ट किया जा सकता है।

हमारी सरकार भी खौलते पानी को देश में व्याप्त जहाँ-जहाँ चीलर प्रवृत्ति है उन पर कठोरतम गुण अपनायें तो चीलर रुपी दानवों का सफाया किया जा सकता है। कपड़े की सफाई करके चीलर को खत्म कर सकते हैं। देश के भीतर खोखला करने वाली ताकतों का सफाया करके देश को आंतरिक रूप से मज़बूत किया जा सकता है।

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जयचन्द प्रजापति ‘जय’
जैतापुर, हंडिया,प्रयागराज

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