साहित्य

हाय रे, मेरा पांच साल (हास्य-व्यंग्य)

जयचन्द प्रजापति 'जय'

नेताजी बोले कि आज गरीब बस्तियों में चलों। वोट का ढेर है। चुटकी बजा दो। वोट का रेला उसकी तरफ हो जायेगा। सरकार चाहे किसकी बने उन गरीबों से इसका क्या मतलब? लालीपॉप थमाना है। इनका पैर छूना है। दो शीशी थमा दो। जिसकी खाते हैं, उसकी गाते हैं।

नेताजी के आदेश पर फुटकर टाइप के नेताओं का झुंड एक- एक वोट छूटना नहीं चाहिए। हल्ला बोलते हुए घर- घर छाप लिये। नेताओं को देखकर गरीब आदमी जान गया कि लगता है पांच साल बीत गया है। पांच साल तक मिलना कुछ नहीं। जितनी शीशी मिले गटक लो।

नेताजी ने दादी को दण्डवत प्रणाम किया। सस्ती वाली साडी़ थमा दी। बड़की चाची तो एक नोट पा गयी। चाचा की चड्डी की व्यवस्था हो गयी। बड़की भौजी घूंघट में से बुदबुदाई कि हमको कुछ दे दो। घूंघट की आड़ में तीन वोट दे दूंगी।

बड़की भौजी के दिलेरी पर नेताजी नोटों की बरसात कर दी। नेताजी बोले कि आप सब का नमक खाया हूँ। जान हाज़िर है। अगर हम जीत गये तो पूरे पांच साल तक शीशी का नि:शुल्क वितरण होगा। एक वोट भी बहकना नहीं चाहिए।

जी भरकर नेताजी शीशी थमाया। सबने जी भरकर पिया । नशा इतना चढ़ गया कि जिस पार्टी को वोट देना था। सारी वोट विपक्ष को ठोंक दिया। नेताजी भड़क गये। एक बोला.. साहब सब लाल-पीला दिख रहा था। एक पर ठोंक दिया।

एक समझदार शराबी ने कहा–तू मेरा पांच साल बर्बाद कर रहा था और मैने तेरा पांच साल बर्बाद कर दिया। नेताजी गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाये। हाय रे, मेरा पांच साल..

……
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
प्रयागराज

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