
होता नवल विहान, लाल रवि आए ।
चहके पंछी अब डाल, समय अब आए।
खिलता नव अरुणिम भोर, लाल रवि आए।
जागे सुप्त धरा-लोक, समय यह आए।।
छूटे तम के सब जाल, किरण मुस्काए।
जीवन में भरें उजास, हृदय हरषाए।।
मंद पवन दे संदेश, नवल गति लाए।
हर ले मन का संताप, सुखद रस छाए।।
कलुषित भाव मिटें आज, सु-मन जग पाए।
प्रेम सुधा बरसे नित्य, जीव मुस्काए।।
क्षणिक यह जीवन मान, शुभ्र सब लाए।
कर लो सुकृत का संचय, समय ना जाए।।
मोह तृषा के बंधन, स्वयं ही ढाए।
सत्य राह पर जो चले, वह पाए।।
पंछी गाएँ मधुर गान, गगन लहराए।
स्वर्णिम किरणों का हार, धरा सजाए।।
हर दिन लाए नवल प्रेर, यही समझ आए।
होता नवल विहान, लाल रवि आए।।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




