
जीवन से पहले और मौत के बाद,
रहता है क्या किसी को कुछ भी याद।
हर याद जीवन की है जीवन के साथ,
चाहे तुम हो सुखी, खुशी या हो उदास।
चाहे तुमने जिया हुआ हो जीवन बिंदास।
मौत के बाद रहना ना है कुछ भी याद।
लोग जीते हैं एसे मानो जीवन के बाद भी जीवन जी जाएंगे।
भले ही खबर पल की ना हो लेकिन सामान तो सालों का सजाएंगे।
जीवन में दोस्त बनाने का भी समय नहीं मिलता लेकिन वह तो हजारों दुश्मन भी बना जाएंगे।
मैं हैरान हूं सोच कर यह जीवन हमको क्यों कर मिला है?.
कुछ तो करने आए होंगे हमने क्या वह सब कुछ करा है?
लोभ और मोह में ही उलझ कर सिर्फ सामान को भरा है।
रिश्ते भी तो ना रहेंगे फिर क्यों कर भला एक दूसरे को छला है?
अच्छा होता जो अच्छे कुछ दोस्त बना लेते।
किसी का कुछ काम कर देते और किसी को अपना बना लेते।
शायद मरने के बाद भी हमारी यादें इस दुनिया में रह जाती।
किसी ना किसी के मन में हम बस जाते और हमारी यादें हमें अमर ही कर जाती ।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा




