साहित्य

रंग

रिया राणावत

बेरंग सी दुनियां में,
रंग भर देती हैं आज़ादी।।
अपने ओर सबके मन में ,
ला देती है खुशियां आज़ादी।।
कोई है पागल से मन के ,
जो तेनाद खड़े है ,
जग जीवन त्याग कर उस पार खड़े हैं।।
वो भर आते है बेरंग दुनिया में रंग ,
सिपाही बन कर रक्षा का सूत्र लिए।।

लड़ कर , मर कर , आज शहीद होकर ,
कर रहे हैं रक्षा सबकी।
आज वो मैदानों में तेनाद खड़े हैं,
जग जीवन का भार लिए खड़े है।।
ना देखी रात उन्होंने ना सुबह ,
ना रुके वो बरसातो में ,
ना रुके कड़ी धूप में,
चट्टान की तरह खड़े होके ,
देश भक्ति के गीत गाते हैं वो ।।
जीवन को न्योछावर नहीं, उन्होंने दान दिया है,
अपनो से पहले श्रम, कर्म को मान दिया है।।
वो मर मिटे देश प्रेम में ,
दीवाने की तरह प्रेम किया हैं।।
धड़कन में दिल नहीं ,देश भक्ति है उनकी,
ना कर्म को कम ना विश्वास को खत्म किया हैं।।

वो हैं देश प्रेमी ,
देश के लिए जान दिए हैं।।
रंग भर दी हमारी दुनिया में ,
रक्षा सूत्र से बांध दिया है।।
पावन इस धरती को ,
ओर निर्मल किया है ।।

–रिया राणावत
कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)

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