साहित्य समाचार

लेखिका अनुप्रिया राय ‘मधु’ की पुस्तक “बच्चों के लिए प्रेरित कहानियां” का गरिमामयी लोकार्पण

पडरौना (कुशीनगर) ।
निराला शब्द संवाद मंच, पडरौना (कुशीनगर) एवं हिन्दी साहित्य भारती, गोरक्ष प्रांत (गोरखपुर) के संयुक्त तत्वावधान में उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज के सभागार में आयोजित वार्षिक समारोह साहित्य, संस्कृति और सृजन का एक भव्य उत्सव बनकर सामने आया। इस गरिमामयी अवसर पर मऊ की शिक्षिका एवं उदीयमान साहित्यकार अनुप्रिया राय ‘मधु’ की चर्चित कृति “बच्चों के लिए प्रेरित कहानियां” का विधिवत एवं भव्य लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम में हिन्दी साहित्य भारती के प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद वाजपेयी, प्रदेश महासचिव डॉ. अमरनाथ द्विवेदी, अध्यक्षता कर रहे प्रख्यात साहित्यकार डॉ. इन्द्र बहादुर सिंह भदौरिया, संचालन कर रहे डॉ. ओमप्रकाश द्विवेदी ‘ओम’, बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कुशीनगर के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर डॉ. गौरव तिवारी, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. वैद्यनाथ मिश्र, डॉ. विद्यासागर उपाध्याय, डॉ. प्रेम चन्द्र सिंह, जीतेन्द्र पाण्डेय ‘जौहर’, डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय, नन्दलाल मणि त्रिपाठी ‘पीताम्बर’, डॉ. शिवनाथ सिंह ‘शिव’ सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी मंचासीन रहे।
पुस्तक के लोकार्पण के उपरांत वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “बच्चों के लिए प्रेरित कहानियां” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि बालमन के निर्माण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। इसमें संकलित प्रेरक प्रसंग बच्चों को न केवल ज्ञान प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें जीवन में संघर्ष, धैर्य, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों के महत्व को समझने के लिए भी प्रेरित करते हैं। वक्ताओं ने यह भी कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में इस प्रकार की पुस्तकों का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि ये बच्चों को सकारात्मक दिशा प्रदान करती हैं।
मंच के संरक्षक डॉ. सुधाकर तिवारी के साथ मदन मोहन पाण्डेय, डॉ. संजय मिश्र, ब्रजेश कुमार त्रिपाठी, भूपेन्द्र राय ‘गंवार’ एवं राणा प्रताप सिंह सहित अन्य साहित्यकारों ने भी अपने विचार रखते हुए लेखिका के प्रयासों की सराहना की और इस कृति को समाज के लिए उपयोगी बताया।
समारोह के दौरान वक्ताओं के उद्बोधनों में साहित्य के प्रति समर्पण, सामाजिक दायित्व और सांस्कृतिक मूल्यों की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ओमप्रकाश द्विवेदी ‘ओम’ द्वारा अत्यंत प्रभावशाली एवं सुसंगठित ढंग से किया गया, जिससे कार्यक्रम में निरंतरता और गरिमा बनी रही।
उपस्थित साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों ने इस आयोजन को एक प्रेरणादायी साहित्यिक संगम बताते हुए कहा कि इस प्रकार के मंच न केवल रचनाकारों को अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में साहित्यिक चेतना को भी सुदृढ़ करते हैं।

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