
मार्ग सही दिखला कर बालक, पुस्तक शिक्षित नित्य करे ।
वेद पढ़ो रखता हिय शीतल, अंतस में वह ज्ञान भरे ।।
दान दया नर राह बताकर, दीन दुखी सब कष्ट हरे ।
कर्म करो तुम श्रेष्ठ सभी अब, जीवन बंधन से उबरे ।।
जीवन पुस्तक-सी समझो तुम, ध्यान सभी रख के पढ़ना ।
सीख सदैव सचेत सभी सुन, नूतन राह तभी चलना ।।
आज सुधार करो सब आदत, निश्चित लक्ष्य सदा रखना ।
है अनमोल बड़ा यह जीवन, रंग सभी इसमें भरना ।।
मूल सभी समझो अब पुस्तक, संस्कृत से यह शब्द बना ।
बुद्धि विकास करे वह मानव, जो जितना पढ़ता उतना ।।
नित्य विवेक चरित्र गढ़े सब, स्वप्न सभी सच हो अपना ।
शिक्षक माँ सम पावन पुस्तक, भाव समेत पढ़ो रचना ।।
हेमा जालान ’कनक’
मुंगेर🙏🏼




