
राहों में कांटे होंगे, ये पहले से तय था,
मंज़िल वही मिलेगी जहाँ हौसला सच्चा था।
गिरकर जो संभल जाए, वही असली खिलाड़ी है,
जो हार से न डर जाए, वही सबसे भारी है।
अंधेरों की क्या औकात, जब मन में उजाला हो,
संघर्ष की हर चिंगारी, एक दिन उजियाला हो।
थककर जो बैठ जाए, वो कहानी अधूरी है,
जो चलते ही रहे आगे, वही जीत पूरी है।
पसीने की हर बूंद में, सपनों की चमक होती,
संघर्ष की हर राह पर, सफलता दमक होती।
ना रुकना, ना झुकना, यही जीवन का सार है,
संघर्ष ही जीवन है, संघर्ष ही जीत का द्वार है
अविनाश श्रीवास्तव
महराजगंज उत्तर प्रदेश




