
हां ! तुम एक स्त्री हो
श्रृंगार और संघर्ष की
सरलता, सहजता की
सौम्या,और सौन्दर्य की
नव प्राकृति की परी हो
हां ! तुम एक स्त्री हों।
ममता और मातृत्व की
प्रेम और नारित्व की
संघर्ष ,सतीत्व की
पुरुषत्व की कड़ी हो
हां ! तुम एक स्त्री हो।
तू अद्भुत, अनुपम
प्राकृति की लवी हो
तू दुर्गा, लक्ष्मी और
सरस्वती की छवि हो।
हा ! तुम एक स्त्री हो।
तू जननी, तू पाल्वी
तू रूपा, स्वरूपा
तू संगीत, सरिता
तू किरण, कल्पना
तुम हर कला की
निपुण,कवियित्री हो
हा ! तुम एक स्त्री हो।
मुन्ना प्रसाद मुरली
रोहतास बिहार




