साहित्य

शस्यश्यामला धरती

ऋतु जैन

पृथ्वी दिवस पेड़ लगाओ धरती बचाओ

नीला अम्बर हरे घने वन,धरती ओढ़े रंग-बिरंगी चुनरियां
नभ से धरा तक मोहिनी छाया,बादल  उमड़ घुमड़ कर आया

उल्लासित आंगन में मेरे, सूरज चमके चंदा दमके
मोती जैसे ओंस की बूंदें,फूलों की रंगत में समायें

तितली भंवरों के गुंजन से, धरती रागमय हो संवर जाये
इसके हम संरक्षक बन, नित नये वृक्ष लगायें

प्लास्टिक करती धरती बंजर, कागज वन नष्ट करायें
पुष्प वन वनस्पतियों से ,नाता हम नित्य बनायें

माटी की सोंधी खुशबू ,धरती की हर सांस में महके
पेड़ पौधे नदियां पर्वत ,अवनी के आंचल समायें

यह बसेरा भोर सवेरा, हमें देता नवचेतना
हम भी कुछ धरतीं को दें,कहती प्रकृति संरचना

कुदरत ने जो दिया धरा को,उसका सब सम्मान करें
ना काटें दरख्त और पहाड़,बल्कि इनकी रक्षा करें

शस्यश्यामला भू का यौवन,आओ इसका श्रृंगार करें
अतुल संपदा संरक्षित करें,यह कर्त्तव्य भाव धरें

नीला अम्बर हरे घने वन,धरती ओढ़े रंग-बिरंगी चुनरियां
नभ से धरा तक मोहनी छाया ,बादल उमड़ घुमड़ कर आया

ऋतु जैन
इंदिरापुरम गाजियाबाद

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