साहित्य

बारिश थी बड़ी शांत

रिया राणावत 

बारिश थी बड़ी शांत

ना कोई ख्वाइश

ना कोई उमंग

बस सोच रही हूँ

की क्यों हैं बार

बारिश बड़ी शांत

ना बादल गरजता

ना पेड़ कांपते

ओर बस में खड़ी देख रही हूँ

क्यों बारिश थी बड़ी शांत

ना कोई राग गा रही

ना कोई गीत सुना रही

लगता है, इससे भी है डर

सब खत्म हो जाने का

गर्मी की बढ़ोत्तरी के साथ

सब सुख जाने का

क्यों बारिश थी बड़ी शांत

बस में भी सोच सकती हूँ,

महसूस कर सकती हूँ

पर उसका दर्द कम नहीं कर सकती

मनो लगता है बारिश रूठ कर

बैठ गई है कोने में

कलकलहती गर्मी में ढूंढ रही हूँ उसे

क्यों बारिश थी बड़ी शांत।।

 

रिया राणावत

कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)

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