
मानव जीवन संघर्षमय बनता है
हर कुटुंब में दहेज एक समस्या है
विवाह के समय धन दौलत देता है
इसे दहेज को लेना संप्रदाय बनता।
आज हर घर घर में दुख होता है
इससे संस्कार को मिट्टी में मिला है
दहेज प्रथा को नियंत्रण नहीं होता है
इससे नित कई समस्याएं पैदा होते हैं।
शादी के समय दुल्हा को देता है
यह पुरातन काल से शुरू होता है
दहेज प्रथा से दुल्हन को सताती है
और शादी से कुटुंब बिखर होता है।
दहेज को लेकर खुश करता दुल्हा
इसे जीवन में विलासप्रियता पाता
और नित दुल्हन से दहेज सताता
इससे दोनों कुटुंब में हलचल बढ़ता।
आज युवकों ने प्रतिज्ञा करना है
दहेज को लेना बुरा गुण होना है
आज दुल्हा दुल्हन दोनों सामना है
यह विषय याद करके आगे बढ़ना है।
श्रीनिवास एन, आंध्रप्रदेश




