साहित्य

सरस्वती वंदना

दिनेश पाल सिंह

माँ शारदे! वरदान दीजिए,

मन में नव अभियान दीजिए।

अज्ञानों का तम हर लीजिए,

ज्ञान-ज्योति का दान दीजिए॥

 

वीणा की झंकार मधुर हो,

वाणी में सत्कार मधुर हो।

शब्द-शब्द में भाव बसाकर,

जीवन को मधुमय कीजिए॥

 

माँ शारदे! वरदान दीजिए…

 

श्वेत कमल-सी बुद्धि निर्मल,

सत्य-पथों पर हो मन अविचल।

विनय, विवेक, सद्भाव भरकर,

जीवन को पावन कीजिए॥

 

माँ शारदे! वरदान दीजिए…

 

लेखनी को शक्ति प्रदान कर,

जनहित का संकल्प महान कर।

राष्ट्र-प्रेम की ज्योति जलाकर,

जीवन को अनुपम कीजिए॥

 

माँ शारदे! वरदान दीजिए…

 

मन से सारे द्वेष मिटाकर,

प्रेम-सुधा के पुष्प खिलाकर।

करुणा, सेवा, सत्य सिखाकर,

मानवता का वंदन कीजिए॥

 

माँ शारदे! वरदान दीजिए…

 

मन में नव अभियान दीजिए।

अज्ञानों का तम हर लीजिए,

ज्ञान-ज्योति का दान दीजिए॥

 

जयति वीणापाणि वरदायिनी,

जय जय माँ सरस्वती।

भक्ति-भाव से शीश नवाकर,

कृपा-सुधा का पान कराइए॥

 

कवि दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’

जनपद संभल उत्तर प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!