
आदमी कुछ बुरा नहीं हूँ मैं
हाँ किसी से डरा नहीं हूँ मैं।
ये जमाना कहा करे कुछ भी
पर कहीं गुमशुदा नहीं हूँ मैं ।
लोग हैरान हो गये ज़रा मुझ से
क्यों अभी तक मरा नहीं हूँ मैं ।
सब यहाँ पारसा बने हुए हैं
कितना सच जानता नहीं हूँ मैं।
मैं नहीं चाहता किसी का बुरा
इस कदर से गिरा नहीं हूँ मै।
मंजुला शरण “मनु”
राँची, झारखण्ड़।




