
#दो सौ वर्षों की गौरव गाथा का
हिंदी ने एक नया इतिहास लिखा,
जन-जन की आवाज़ बनकर
सच का सुंदर नव दीप लिखा
कलम बनी जब जन की शक्ति
शब्दों ने नई हुंकार भरी,
अन्यायों के काले बादल पर
सच्चाई की जब मार पड़ी।
गांव-गांव की पीड़ा लेकर
चौपालों तक ये बात गई,
जनमन की हर धड़कन बनकर
हिंदी की नई सौगात हुई ।
स्वाधीनता के संग्रामों में
जिसने अलख ये जगाई थी,
भारत मां के वीर सपूतों की
गाथा हर घर-घर गाई थी।
समय बदलता रहा निरंतर
बदले साधन और विचार,
लेकिन सच की राह पकड़कर
चलता रहा इसका भी संसार।
स्याही से लेकर स्क्रीन तक
इसका ही उजियारा फैला है
हर युग में जनहित की खातिर
इसने हर साहस से खेला है।
नमन तुम्हें हे हिंदी पत्रकारिता
तुम लोकतंत्र की शान हो,
जन-जन के विश्वास की धड़कन
भारत मां का मान सम्मान हो।
दो सौ वर्षों की यह यात्रा युगों-युगों तक याद रहे
सत्य न्याय और जनसेवा का यह पावन संवाद रहे।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




