साहित्य

उम्मीदों का आंचल

रिया राणावत

सपनों की चाह को मरने ना दे ,
खुदको फिर से बिखरने ना दे ,
हो जायेगा तू कामयाब रे,
अपनी उम्मीदो को टूटने ना दे।।

‍उम्मीदों को बढाएगा,
अपनों का साथ पाएगा ,
उम्मीदों के सहारे,
तू क्या –क्या कर दिखाएगा।।

उम्मीद की नींव ,
इतनी कर तीव्र,
तू खुद पत्थर बन जा ,
ओर उम्मीद का दमन बना।।

उम्मीद को धड़कन,
बसा अपने मन में हरदम,
धड़कन को उम्मीद ,
का आंचल बना हरदम ।।

दिल की चाह को ,
कार्य पूर्ति में लो,
अपनी उम्मीदो को ,
अपने श्रम में लो।।

सपनों की चाह को मरने ना दे ,
खुदको फिर से बिखरने ना दे ,
हो जायेगा तू कामयाब रे,
अपनी उम्मीदो को टूटने ना दे।।

– रिया राणावत
कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)

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