
ज़िंदगी का कठिन होना कोई अभिशाप नहीं, बल्कि मानवीय फितरत को सुधारने का नियम है। इंसान बिना संघर्ष या मुफ़्त में मिली चीज़ों,जैसे साँसें, निश्छल प्रेम और सुख-सुविधाओं की अहमियत नहीं समझता। जो धूप में नहीं जला, वह छाँव की शीतलता को कभी महसूस नहीं कर सकता।
यदि हर मंज़िल आसानी से मिल जाए, तो जीवन से कद्र और कृतज्ञता समाप्त हो जाएगी। कठिनाइयाँ और ठोकरें हमें तोड़ती नहीं, बल्कि तराशकर पत्थर से भगवान बनाती हैं। मुश्किलें जीवन में इसलिए हैं ताकि हम हर छोटी नियामत की सही क़ीमत जान सकें और मिलने वाली मंज़िल की कद्र करें।
-डो.दक्षा जोशी ‘निर्झरा’
अहमदाबाद, गुजरात।




