साहित्य

अतीत से अब तक…. फीफा विश्व कप…

कार्तिकेय त्रिपाठी

कहते हैं जब युद्ध की विभीषिका अपने पैर फैलाती है तो समाज का कोई आंगन इससे अपने आपको सुरक्षित नहीं रख पाता , भले ही वह खेल का मैदान ही क्यों न हो ।यही कारण था की पूरे पूरे 12 वर्ष के अंतराल के बाद अंततः ब्राजील की मेजबानी में चौथे विश्व कप का आयोजन संभव हो सका ।

पिछले तीन आयोजनों से अपने आप को दूर रखने वाला इंग्लैंड भी फीफा की लोकप्रियता से अपने आप को दूर नहीं रख सका,और उसने भी विश्व कप में भाग लेने की घोषणा कर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया ।इस स्पर्धा के लिए भारत को भी निमंत्रण मिला था, पर भारतीय टीम ने इसे दरकिनार कर एशियाई और ओलिंपिक खेलों के लिए अपनी तैयारी को ज्यादा महत्व दिया। हां यह जरूर है कि इसके बाद भारत को कभी विश्व कप में भाग लेने की पात्रता ही नहीं मिली। स्कॉटलैंड व तुर्की की अनुपस्थिति, जर्मनी की फीफा सदस्यता रद्द होने से, फ्रांस, रूस और गत उपविजेता हंगरी , चेकोस्लोवाकिया विभिन्न कारणों से ब्राजील नहीं आए।

मेजबान देश ब्राजील में अपने खिलाड़ियों को विश्व कप से पूर्व ही बेशुमार सुविधाएं उपलब्ध कराई ,वह हर हाल में विश्व कप खिताब जीतना चाहता था । वास्तव में ब्राज़ील की टीम में कई चर्चित व होनहार युवा खिलाड़ियों का मिश्रण था। इटली की टीम विश्व कप में भाग लेने की औपचारिकता भर पूरी करने आई थी, उसके कई दिग्गज खिलाड़ी एक विमान दुर्घटना में काल के ग्रास बन गए थे,ब्राजील व मेक्सिको के बीच उद्घाटन में खेला गया और ब्राजील ने 4-0 से मैच जीतकर अपने इरादे दर्शा दिए ।ब्राजील स्विट्जरलैंड से ड्रा व यूगोस्लावाकिया को 2-0 से हराकर अपने समूह का विजेता बना। फुटबॉल के जन्मदाता इंग्लैंड को अमेरिका व स्पेन से पराजय मिली। समूह सी में इटली की कमजोर टीम स्वीडन से हार गई।पूर्व विजेता उरुग्वे ने अपने एकमात्र मुकाबले में नया रेकॉर्ड बनाया, जब उसने कमजोर बोलीविया को 8-0 से करारी शिकस्त दी ।दूसरे दौर में

ब्राजील ने स्वीडन और स्पेन को कृमषः 7-1 और 6-1 से हराकर अपनी दावेदारी और प्रबल कर दी ।जबकि उरुग्वे ने स्पेन के साथ 2-2 से ड्रा और स्वीडन को 3-2 से परास्त कर शीर्ष दो टीम में जगह बनाई । अब बारी थी इस स्पर्धा के अंतिम व सबसे महत्वपूर्ण मेंच की । ब्राजील विशाल गोल अंतर से जीत दर्ज कर शीर्ष पर था और वह उरुग्वे से सिर्फ ड्रा खेलकर भी खिताब हासिल कर सकता था , जबकि उरुग्वे को मेंच जीतना जरूरी था । मैच की शुरुआत में ही दोनों टीमों ने काफी उम्दा खेल का मुजाहिरा किया तो दूसरी और मेजबान देश का खेमा जीत के प्रति आशान्वित था।मारकाना स्टेडियम में करीब 173,850 दर्शकों की उपस्थिति में सभी के दिलों की धड़कन तेज हो गई ।पूर्वार्द्ध गोलरहित रहा,पर उत्तरार्द्ध के दूसरे मिनट में ही मेजबान देश केविंगर फ्रियांका ने गोल कर खुश होने का मौका दे दिया दर्शक खुशी से उतावले हो रहे थे ।लेकिन यह खुशी अल्प समय में ही हवा हो गई,जब कुछ ही देर में शियाफनों ने बराबरी का गोल दाग कर ब्राजील की उम्मीदों पर तुषारापात कर दिया । जब खेल अपने पूरे चरम पर था तब खेल के 80 वें मिनट में उरुग्वे के चीते से तेज खिलाडी़ घिगिया ने चमत्कारी गोल कर स्टेडियम में एकदम नीरवता व्याप्त कर दी , यही गोल उरुग्वे के लिए दूसरे विश्व खिताब का सबब बना ,तो दूसरी और मेजबान ब्राजील के लिए गहन वेदना और निराशा का कारण बना ।जीत-हार से परे देखा जाए तो असल में खेल की जीत हुई ।

स्वीडन तीसरे स्थान पर रहा।चौथे विश्व कप के 22मेंच में 88 गोल हुए।

ब्राजील के एडेमीर स्पर्धा में 9 गोल कर अग्रणी रहे । कई यादगार मेंचों की दावत दे विश्व कप अलविदा कह गया..स्विटजरलैंड में पुनः मिलने का वादा देकर । राम-राम …

शेष कल… …

.✍कार्तिकेय त्रिपाठी राम

इन्दौर.7869799232

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