
ख्यात साहित्य साधक डॉ रामशंकर चंचल ने आज अपनी ताजा लघु कथाओं की कृति इंकलाब पब्लिकेशन बंबई द्वारा प्रकाशित कृतियों में, वो गली वो मकान भेंट करते हुए, उन्हें प्रणाम करते हुए,डॉ अंजना मुवेल जी को कहां कि यह सब कुछ आप का स्नेह और आशीष है जिसे मैं ही जानता हूं आज अपने जिस मुकाम पर खड़ा हूं उसमें आप का स्नेह आशीष सदा ईश्वरीय आशीष की तरह साथ रहा है ,डॉ अंजना ने डॉ चंचल की साहित्य साधना की सराहना करते कहाँ कि कितना कुछ साहित्य को दिया जिसे याद करे तो बहुत समय लगेगा
लम्बे समय बाद दोनों साहित्य साधक का मिलना कुछ समय मिले अथाह याद ताजा हो गई अंत मैं डॉ चंचल ने डॉ अंजना जी को सादर प्रणाम करते- जाना है जल्दी आप भी व्यस्त है और मैं भी, पता नहीं समय ऐसे निकल जाता है कि. बहुत कुछ और बाकी है सदा बना रहेगा मन आत्मा मैं आदरणीय डॉ अंजना जी सादर वंदन




