
बेहद उदास बैठा हुआ
मन और आत्मा
जैसे बस अब दिल
बैठ जायेगा
बहुत सब्र किया
कोई राहत नहीं
कोई सुकून नहीं
कोई अपना सा नहीं
तभी अनायास जैसे
किसी ने जिंदगी की
जाती हुई सांसों में
प्राण फूंक दिए और
अनायास दस्तक देता
यह अद्भुत मन को
सुकून देता हुआ
दिल और दिमाग में
रम गया, बस गया
इस कदर जैसे
सदियों से बंद हवेली की
किसी ने खिड़की खोल दी
और उस से जाती
हवा, रोशनी से
निर्जीव आत्मा में
परम फूंक दिए
वंदन सत् सत् वंदन
इस मन आत्मा को
जीवंत कर
सक्रिय रख
ऊर्जा और जीवन देने के लिए
वंदनीय है यह छवि
यही प्राण वायु
वंदनीय है परम् पूज्य
रूह , सत् सत् वंदन
पहली बार अहसास हुआ
कोई चित्र भी
किसी को
जिंदगी दे जाती हैं
बस यूं ही बैठी रही
मेरे सामने
जिंदगी कट जायेगी
बहुत बहुत कुछ करते हुए
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश


