साहित्य

पर्यावरण संरक्षण 

लक्ष्मी सिंह

परकरती प्रकृति निश्छल प्रेम अपार

पेड़ पौधे पशु पक्षी इसका श्रृंगार

करें हम भी इनका संरक्षण

जिससे महके हमारा यह संसार

 

फल फूल सब्जी औषधी हैं देते

पशु पक्षियों को आसरा हैं देते

इनसे ही होती है वर्षा

जीवन जीने को प्राणवायु हैं देते

 

अल्पवृष्टि अतिवृष्टि भूकंप आपदाएं न आए

ग्लोबल वार्मिंग ओजोन परत ग्लेशियर न पिघलने पाए

करें विवेकपूर्ण प्रयोग संसाधनों का

महत्वाकांक्षा के लिए पर्यावरण भेंट न चढ़ाएं

 

प्लास्टिक कचरा इधर-उधर न फैलाएं

कारखाने का गंदा पानी नदियों में न बहाएं

इनका उचित निस्तारण करके

स्वर्ग से सुंदर धरा को प्रदूषण से बचाएं

 

हरियाली को न मिटने दें

पेड़ न काटें न कटने दें

वृक्षारोपण को महत्व देकर

भावी पीढ़ी को न मिटने दें

 

आओ पेड़ का साथ निभाएं

पेड़ लगाएं पेड़ बचाएं

इस पावन वसुधा पर

अपना अस्तित्व बचाएं

 

लें संकल्प पर्यावरण संरक्षण का

हम सब ध्यान रखें इस सृष्टि का

ताकि मिले शुद्ध जल और वायु

नाश न हो वसुधा पर जीवन का

 

लक्ष्मी सिंह

जलालाबाद शाहजहांपुर

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