साहित्य

सावन पर सरस कविता

डॉ अनमोल कुमार

बूंद-बूंद बरसे घटा, धरती हरी-भरी,

सावन आया झूम के, लाई खुशियां ढेरी।

 

पीपल-पत्ते झूमते, झूले पड़े डार,

राधा-कृष्णा गीत गाएं, गूंजे बंसी की तान।

 

हर-हर महादेव गूंजे, शिव मंदिर में शोर,

बेल-पत्र, जल चढ़े, भक्तों की भीड़ घनघोर।

 

मेंहदी के रंग, सोलह श्रृंगार,

सावन की फुहारों में भीगे सब त्योहार।

 

बोलो हर महादेव!

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