साहित्य

समय ही अपना है

डाँ आदेश कुमार

इस दुनिया की भीड़ में,

हर चेहरा अपना लगता है,

जब भाग्य की धूप

आँगन में उतरती है।

हाथ मिलाने वाले बढ़ जाते हैं,

रिश्तों की शाखों पर

स्नेह के फूल खिल उठते हैं,

और हर आवाज़ में

अपनापन सुनाई देता है।

पर समय जब करवट बदलता है,

सुख की राहों पर

कठिनाइयों की धूल बिछ जाती है,

तब कई चेहरे

धुंध की तरह ओझल हो जाते हैं।

जो कल साथ चलने का वादा करते थे,

आज दूर खड़े दिखाई देते हैं,

और मन समझने लगता है

कि संसार का सबसे सच्चा साथी

स्वयं समय है।

समय अच्छा हो तो

पराये भी अपने बन जाते हैं,

और समय विपरीत हो तो

अपने भी पहचान बदल लेते हैं।

फिर भी निराश मत होना,

क्योंकि हर अँधेरी रात के बाद

सूरज फिर उगता है,

और हर कठिन घड़ी के बाद

नई सुबह आती है।

इसलिए विश्वास रखो,

अपने कर्म पर, अपने साहस पर,

क्योंकि समय स्थिर नहीं रहता,

वह बदलता है, आगे बढ़ता है।

जो आज अकेला है,

कल उसके साथ कारवाँ होगा,

बस धैर्य की लौ जलाए रखना,

क्योंकि इस दुनिया में

सबसे बड़ा सच यही है—

समय बदलता है,

और समय ही अपना है।

*डाँ आदेश कुमार पंकज*

*शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश*

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