
झाबुआ मध्य प्रदेश आदिवासी पिछड़े अंचल के जीवन दर्शन पर दस्तक देती बेहद चर्चित कविता आदिवासी एक कालजयी कविता बन गई जिसकी यात्रा स्व महिपाल भूरिया द्वारा भीली भाषा में अनुवाद कर इसे उनके मौलिक कृतियों में सदा ही सम्मान से स्थान दिया गया अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ, यही कविता डॉ रामशंकर चंचल की लघु कथाओं कृति अंग्रेजी भाषा में अनुवाद हुआ डॉ पुलकिता जी आनंद द्वारा ,पहली बार अमेज़न पर दस्तक देती के अंत में हिंदी में एक मात्र यह कविता दी गई जो विश्व पटल पर दस्तक दे हजारों हजारों द्वारा सराही गई
यही कविता डॉ रामशंकर चंचल ने झाबुआ गेल लिमिटेड गेलर बड़ी में हिंदी कार्यशाला में अपने स्तर में सुनाई जिसके यू ट्यूब वीडियो देश और दुनिया में अभी तक आठ हजार द्वारा सुन सराही गई और इसी कविता को रंजीता निनामा जी द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद कर उनके ही उम्दा स्वर में व्यक्त कर यूं ट्यूब चैनल पर दस्तक दी जिसे भी अन्य तक आठ हजार द्वारा सुन सराही गई
इस अद्भुत कविता ने वो इतिहास रचा जो सदियों जिन्दा रहेगा और यह साबित करता है कि एक कविता भी कवि की सृजन धर्म को अमर कर देते हैं
वंदनीय कविता है जो आदिवासी जीवन दर्शन के अद्भुत सत्य मंत्र को सामने रखती हैं कि, सदा ही प्रसन्नचित रहना ही ईश्वर की सबसे बड़ी साधना है
प्रतिक्रिया के बेशुमार प्यार और आशीष देती यह कविता आज हर
सुनने वाले के दिल और दिमाग में हिंदी में डॉ रामशंकर चंचल के शवर में और अंग्रेजी में रंजीता निनामा जी के स्वर में छाई हुई है




