
(शादी के बाद अबैध संबंध अपराध नहीं -सुप्रीम कोर्ट)
बदल गई व्यभिचार की, यह कैसी परिभाषा ।
वैवाहिक संबंध में, होगी घोर निराशा ।।१।।
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वैवाहिक संबंध में, घोला जहर निराला ।
इससे तो अच्छा यही, भँवरा बन रह लाला ।।२।।
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आजादी के नाम पर, मत करिए बर्बादी ।
टूटेंगी जब मान्यता, कौन करेगा शादी ।।३।।
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ऐसे सब कानून पर, संसद ध्यान लगाए ।
भारत के भूगोल से, तुरंत इसे हटाए ।।४।।
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वैवाहिक जन पर नहीं, अन्य यौन पर रोका ।
बच सकता परिवार क्या, कोई करे न टोका ।।५।।
*-राम किशोर वर्मा*
जयपुर (राजस्थान)
दिनांक:- ०४-०६-२०२६ गुरुवार




