साहित्य

स्वतंत्रता के बाद का भारत

वीणा गुप्त 

स्वतंत्रता के बाद का भारत,

वीरों के बलिदानों पर,

हुए कुठाराधात का भारत,

आंधी-झंझावात का भारत।

 

राजनीति की शतरंजों पर,

चलती शह औ मात का भारत।

प्रजातंत्र में भूखी मरती,

जनता के जज़्बात का भारत।

 

धर्म के अवसान का भारत।

आडंबर औ’अभिमान का भारत।

मंदिर,मस्जिद,पूजाघरों में,

दम तोड़ रहे भगवान का भारत।

 

मज़हबी  नारों का भारत।

नफ़रत-हाहाकार का भारत।

बढ़ते भ्रष्टाचार का भारत।

गिरते शिष्टाचार का भारत।

 

जातीय भेदभाव का भारत,

भाषायी विवाद का भारत।

आरक्षण-ज्वाला में जलती,

योग्यता के अवसाद का भारत।

 

सच के ऊपर सदा लटकती,

झूठ  की तलवार का भारत।

नारी के चीत्कार का भारत,

हत्या बलात्कार का भारत।

 

उपलब्धियों को व्यंग्य बनाता,

त्याग अहिंसा को झुठलाता,

हिंसा-आतंकवाद का भारत,

थोथे आदर्शवाद का भारत।

 

प्रकृति के दोहन का भारत,

मूल्यों के रोदन का भारत।

अनय और शोषण का भारत,

भविष्य- कुपोषण का भारत।

 

क्या यह भारत बन न सकेगा??

 

हम सबके अरमान का भारत

सामवेद के गान  का भारत।

बुद्धि और विज्ञान का भारत।

मानवता के सम्मान का भारत।

 

उजली सूर्य किरण का भारत।

निखरे नील गगन का भारत।

शस्य भरी मुस्कान का भारत।

गंगा के कलगान का भारत।

 

एकता और निर्माण का भारत

संस्कृति के उत्थान का भारत।

विश्वसमूह में अलग दमकती,

अपनी ही पहचान का भारत।

 

आसमान में मुक्त लहराते,

तिरंगे के सम्मान का भारत।

गाएं जनगण महिमा जिसकी,

ऐसे नवल विहान का भारत

तेरा ,मेरा ,सबका भारत।

स्वतंत्रता के बाद का भारत।

 

वीणा गुप्त

नई दिल्ली

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