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अतीत से अब तक …. फीफा विश्वकप फुटबॉल..

कार्तिकेय त्रिपाठी

एकीकरण की खुशी और जर्मनी का स्वर्ण..

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58 वर्षों के दीर्घ अंतराल के बाद अंततः इटली को दूसरा अवसर मिला , इस फुटबॉल महाकुंभ को आयोजित करने का ।स्पर्धा के दौरान अधिकांश मेंच बेहद ही रोमांचक और संघर्षपूर्ण रहे ।यहां दूसरे दौर में कैमरून ने सारी संभावनाओं को दरकिनार करते हुए पिछले विजेता अर्जेंटीना को 1-0 व रुमानिया को 2-1 से परास्त कर दूसरे दौर में प्रवेश किया ।समूह एफ में तो इतना घमासान था कि खेले गए छह मेंचों में से पाँच ड्रा रहे। दूसरा दौर भी कोई कम रोमांचक नहीं था। यहां केमरून का जोश बरकरार रहा, उसने कोलंबिया को 2-0 से शिकस्त देकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। तीन बार की विजेता ब्राजील को अर्जेंटीना ने पल-पल संघर्ष का पर्याय बने मेंच में 1-0 से पराजित किया, तो इटली ने दो बार के विजेता उरुग्वे को 2-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में दाखिला लिया।

यहां जर्मनी ने चैकोस्लोवाकिया को 1-0 से तो केमरुन के जीत की और भागते घोडे़ की लगाम थामी इंग्लैंड ने ( 3-2),इटली ने आयरलैंड को कडे़ संघर्ष के बाद 1-0 से पराजित कर सेमीज में प्रवेश किया।

दोनो ही सेमीज में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन हुआ,टाइब्रेकर में अर्जेटीना ने इटली को और प.जर्मनी नें इंग्लैंड को 4-3 के समान अंतर से शिकस्त दी।

इटली ने कांस्य पदक मुकाबले में इंग्लैंड को 2-1से मात दी।

अन्य सभी दावेदार टीमों का समीकरण बिगाड़ कर गत विश्वकप में फाइनल खेली दोनो टीमें फिर आमने-सामने थी, दर्शकों का शोर पूरे उफान पर था , 84 मिनट बिना गोल के गुजरे ,अक्समात जर्मन आन्दृयास ब्रह्ममें के गोल ने अर्जेंटीना की पराजय पक्की कर दी, जर्मनी ने तीसरी बार खिताब जीता।

कुल 52 मेंचों में 115 गोल और सर्वाधिक गोल करने का सेहरा बंधा इटली के सल्वातोर सिलाची(6गोल)के नाम।

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अमेरिका (1994 )

ब्राजीली सांबा फिर थिरके..

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अमेरिकी विश्व कप पूरी तरह आधूनिकता का जामा पहने था, मुनाफा भी विश्वकप-दर-विश्वकप बढ़ रहा था।पहले ही विश्वकप में तीसरा स्थान , बस अब तक यही उपलब्धि थी अमेरिका की विश्वकप में, ..खैर।

लीग मेंचों में आयरलैंड नें इटली को 1-0(रे हाटन के गोल ) से हराना ही एकमात्र अप्रत्याशित परिणाम था। दूसरे दौर में उलटफेर किया रुमानिया ने अर्जेंटीना को 3-2 से हराटर किया,ब्राजील ने मेजबान अमेरिका को बबेतो के गोल की मदद से हराकर बाहर किया।

क्वार्टर फाइनल में इटली ने बल्गारिया को 2-1से,ब्राजील नें हाँलेंड को 3-2से,स्वीडन ने रुमानिया को टाईब्रेक में 5-4 से परास्त किया ।बल्गारिया ने गत विजेता जर्मनी को 2-1से हराकर तहलका मचा दिया ।

टीमें खिताब के ख्वाब सजोने लगी थीं, सेमीज में अपेक्षाओं के अनुरूप इटली ने बल्गारिया को 2-1 से मात दी, खतरनाक राबर्ट बेजियो ने मात्र पांच मि. में दो गोल दागे। ब्राजील ने रोमारियो के एकमात्र गोल की मदद से स्वीडन को हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई।

स्वीडन ने बल्गारिया को 4-0 से दरकिनार कर कांस्य पदक जीता।

अब सबकी निगाहें फाइनल पर थीं ,खिताब की दोनो प्रबल दावेदार, जोरदार संघर्ष और उत्तेजनाओं से भरपूर मेंच,90मि. खत्म ,कोई गोल नहीं, अतिरिक्त समय ,30 मि. खत्म, वही ढाक के तीन पात,विश्वकप फाइनल मे पहली बार टाइब्रेकर का उपयोग,3-2 से ब्राजील आगे और इटली के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी राबर्ट बेजियो का पेनल्टी बाहर, सांबाई धुन पर ब्राजिलियन खिलाडियों की जीत (3-2 ) का जश्न,इटली के खेमें में निराशा, पर सबसे परे खेल की फुटबॉल की हुईजीत।

कुल 52 मेंचों में 141 गोल और बुल्गारिया के स्टेइचकोव व रूसी ओलेग सेलेंको संयुक्त रूप से 6-6 गोल करने में सफल रहे।

अब चलना हैं फ्रांस की रंगीनियों की और ….पर कल, तब तक के लिए राम-राम…

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कार्तिकेय त्रिपाठी (राम)

इन्दौर , 7869799232

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