
जय जवान! जय हिन्द!
कारगिल के अमर शहीदों को शत-शत नमन।
जब-जब सीमा पर संकट ने,
भारत को ललकारा है,
वीरों ने अपने शौर्य से,
फिर से इतिहास सँवारा है।
बर्फ़ीली दुर्गम चट्टानों पर,
साहस दीपक बन जलता है,
हर सैनिक के दृढ़ संकल्प से,
हिम भी अंगारा लगता है।
गोली, बम, बारूदों के मध्य,
कदम निर्भयता से बढ़ते रहे,
माँ के आँचल की रक्षा हित,
जान अपनी अर्पित करते रहे।
टाइगर हिल की ऊँची चोटी,
गूँजी जय-जयकारों से,
तिरंगा फिर मुस्काया जग में,
वीरों के सत्कारों से।
किसने देखा मृत्यु है सामने,
किसने जीवन का मोह किया,
भारत माँ की आन बचाने को,
हर सपूत ने विद्रोह किया।
जो लौटे, वे गौरव बन गये,
जो सोए, उनकी अमर कहानी हैं,
हर श्वासों में बसने वाले,
वो भारत के बलिदानी हैं।
माँ की आँखों के वे तारे,
धरती के अनुपम श्रृंगार हैं,
उनके शौर्य और बलिदानों को,
नतमस्तक नमन बारम्बार है।
आओ उनके चरण नमन कर,
यह संकल्प पुनः दोहराएँ,
राष्ट्रधर्म सर्वोपरि रखकर,
भारत का सम्मान बढ़ाएँ।
जब तक गंगा बहती रहेगी,
जब तक हिम का मान रहेगा,
कारगिल के वीरों का यश,
भारत की पहचान रहेगा।
स्वरचित मौलिक अभिव्यक्ति
सुमन बिष्ट, नोएडा




