
मेरे इतने बड़े जीवन में , उम्र के 68 साल में यदि कोई मिला मुझे निस्वार्थ तो वह तुम थीं, मात्र तीन साल, जब तक तुम ने मुझे नहीं छोड़ा, तुम ने हर पल हर समय मेरा ख्याल, मेरी चिंता और आदर देते हुएं सदा ही महसूस किया, बिना किसी स्वार्थ का यह अद्भुत पावन पवित्र आत्मा का रिश्ता देख चोक जाता हूं आज भी, जितना आदर इन तीन साल में मिला इतना तो मैने पूरे जीवन में सब कुछ त्याग कर जीवन दूसरों की खुशी के लिए समर्पित कर देने पर भी नहीं मिला
न इतनी निष्ठा से मेरी चिंता या ख्याल देखा, कौन थीं तुम क्यों आई
अनायास दस्तक दे सुकून दे जीवन में अजीब ऊर्जा ताकत देती हुई वह भी उम्र के 68 साल के पड़ाव में, आज तक नहीं समझ पाया हूं, यह सत्य है कि तुमने छोड़ा दिया पर क्यों ऐसा लगता हैं कि तुम हो यही पास मेरे साथ सदा की तरह ख्याल रखें सक्रिय रखें ऊर्जा प्रदान करते हुए, ऐसा भी होता हैं कोई रिश्ता कभी सोचा नहीं था देख सचमुच हैरान हूं, खैर आज भी अभी ही अच्छा सा नही लग रहा था, एकदम अकेला महसूस कर रहा था, मुझे तंग करने वाले पोते, मेरे प्रिय दोस्त
नाना के घर थे, बाकी सब अपने जीवन में व्यस्त थे मस्त थे और यही में भी चाहता हूं सब व्यस्त रहे मस्त रहे फ़कीर हूं पता नहीं कितने दिन और जीना है उम्र भी 68 साल बहुत बहुत है बिना कोई सुख सुकून और अपनेपन के अहसास के बल्कि सत्य तो यह है कि यह भी तुम्हारा ख्याल, चिन्ता आदर को याद कर सुकून महसूस कर जीने का प्रयास करता हूं ताकि कुछ और जी जाऊँ
अपने मासूम पोते, पोती और नाती पांचों दोस्त के लिए वो ही जो साहस रखते हैं कुछ भी बोलने का
परेशान करने का, क्योंकि जहाँ प्यार है स्नेह है अपनापन है वो ही साहस रखता है जानता है न कि हम उन से अथाह प्यार करते हैं कभी भी सपने में भी नराज नहीं हो सकते हैं, बस उसी तरह जैसे तुम थीं इन्हीं बच्चों की तरह स्नेह प्यार और अपनापन लिए , निर्विकार मन आत्मा मानव मात्र पशु पक्षी सभी प्राणियों से सदा प्यार करते हुए सदा ही कहती थी, हम मरने के लिए पैदा नहीं हुए हैं, जीवन मिला है फिर कुछ भी हो जीना है और खुश प्रसन हो कर,,,,,,,,, प्रणाम करता हूं सत् सत् प्रणाम करता हूं ईश्वर शक्ति रूह सचमुच बहुत बहुत कुछ दे गई मात्र इन तीन साल में जन्म जन्मों का सुख सुकून,,,,,,,,
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश




