
अंधविश्वास सदा मन में अंधेरे को भरता।
ज्ञान ज्योति अंतस में रहती घना अंधेरा धरता।।
झूठे बेबुनियाद के झंझावातों मेंजकड़े।
अपने विवेक को खोकर व्यर्थ बातों को पकड़े।।
बाहर जाते छींक आ गई बिल्ली रास्ता काट गई।
कर्म सत्य का कर ले प्राणी भाग्य कभी रूके नहीं।।
साधु बाबा के ढ़ोगी बातों में पड़कर जनता रोती।
भाग्य भरोसे बैठी रहती किस्मत दोष ही देती।।
पढ़े लिखे हम सब जन अब है कर्म पे रख विश्वास।
सत्य तर्क के ज्ञान से पूरी होती आस।।
बुद्धि सदा मनुज तन पाया उस पर करो विचार।
कर्म प्रधान जगत है जाना रखना सद आधार।।
अंधविश्वास मिटे जग से मन में भाव जगायें।
ज्ञान भाव की ताकत से हम अंधविश्वास मिटायें ।।
स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




