साहित्य

बाद जाने के भी सबको बहुत याद आओ तुम विधा मुक्तक

एस के कपूर

*तन को नहीं किरदार को महकाओ तुम।

हमेशा प्रेम का दीपक ही जलाओ तुम।।

दुआ लो और दुआ दो यही काम हो तुम्हारा।

छूटे रिश्तों को जरा फिर से गले लगाओ तुम।।

2

जो वादा किया उसको जरूर निभाओ तुम।

मत किसी की राह में कांटे बिछाओ तुम।।

दर्द में हर किसी के हमदर्द बनो तुम जरा।

अंधेरों में किसीको जरा रोशनी दिखाओ तुम।।

3

तुम्हारे बिगड़े बोल न कभी दुर्व्यवहार बने।

कभी किसीके दुख का नहीं आप आधार बने।।

बनना है तो बने डूबते को तिनके का सहारा।

सिखाओ बच्चों को कि भविष्य के कर्णधार बने।।

4

हो सके जितना प्रेम के ही गीत सुनाओ तुम।

भूलकर भी नहीं नफरत की दीवार उठाओ तुम।।

अपनी करनी का भी फल-कुफल मिलता जीवन में।

बाद जाने के भी सबको बहुत याद आओ तुम।।

*रचयिता।।एस के कपूर “श्री हंस”*

*बरेली।।*

*©. @. skkapoor*

*सर्वाधिकार सुरक्षित*

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