साहित्य

बरखा

मीनाक्षी शर्मा

प्रफुल्लित हुए वृक्ष लतायें

शाखाएँ मंद मंद लहरायें

मस्त हो बयार करें नर्तन

रमणीयता के रम्य दर्शन

 

आ गयी आनंद की घड़ियॉं

जलक्रीड़ा में फुदके चिड़िया

छिप-छिप रवि करे मिचौली

टर्र टर्र् सुने मण्डूक की बोली

 

हुई शीतल आर्द्र अनुभूति

जीवन्त वातावरण प्रतीति

टप – टप होता देख पानी

कोकिल बोली मीठी बानी

 

हुई वसुधा तृप्त नीर पीकर

बरसे खूब जब मेघ आकर

खेत- बगीचें सब ही निखरे

बरखा के जब मोती बिखरे

 

मीनाक्षी शर्मा ‘मनुश्री’

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