मां देखो तेरे भगवान।
बैठे मंदिर सीना तान।
लेते कितने मनुहार मान।
सुनते अनेकों गीत गान।
रहते देखो कितनी शान।
नही पकड़ती इनके कान।
करती मां इनके सब काम।
कहती ये गुणों की खान।
तुम कहती हम है नादान।
नही जरा हमको है ज्ञान।
कहदो मां अपने भगवान।
हमे बिठा ले अपने स्थान।
छूटे पढ़ने से हमारी जान।
मिले हमे भी ढेरो मिस्ठान।
उनके जैसा हमे ढेरो मान।
सुनू दादी की सुरीली तान।
स्वरचित
मीना तिवार
पुणे




