साहित्य

एक नज़र मिला दो उनसे

दिनेश पाल सिंह

एक नज़र मिला दो उनसे, दो पल को जी लेंगे हम,

ना मिल सके उनसे, अश्कों के जाम पी लेंगे हम।

 

रोकिए मत आज हमको, उनसे मिलने दीजिए,

एक नज़र मिल जाए, फिर सुकून से जी लेंगे हम।

 

कैद तन की है, मगर रिश्ते सलाखों से परे,

वो दुआ में साथ हों, तो हर सज़ा जी लेंगे हम।

 

वो सलाखों के उधर हों, हम इधर मजबूर हों,

हाथ छू न सकें, नज़रों से गले मिल लेंगे हम।

 

कई रातें तो तेरी यादों के सहारे कट गईं,

तू गर मिले, तो कुछ सुकून से जी लेंगे हम।

 

इम्तिहाँ के और कितने दौर गुज़रेंगे अभी,

तू गर साथ हो, हर इक सज़ा जी लेंगे हम।

 

दिल की धड़कन कह रही है, हार मानें क्यों भला,

तेरा नाम लेकर हर ग़म को भी पी लेंगे हम।

 

मक़ता

 

‘दिव्य’ इतनी-सी तमन्ना है, यही अरमान है,

वो गले से लग जाएँ, फिर सुकूँ से जी लेंगे हम।

 

दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’

जनपद संभल उत्तर प्रदेश

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