साहित्य

गुरु पूर्णिमा 

डॉ. अनीता शाही

सत्य असत्य में जो भेद बताए

जीवन पथ पर जो चलना सिखाए

वही सच्चा गुरु कहलाए

गुरु के बिना ज्ञान नहीं

ज्ञान के बिना कोई महान नहीं

भटक जाता है जब इंसान

तब गुरु ही देता है सच्चा ज्ञान

गुरु ने दी शिक्षा जहां

उठी शिष्टाचार की मूरत वहां

शिष्य का नाम बढ़े जगत में

उसका यही अरमान रहे

सबके हृदय में उसके प्रति

बस इसीलिए सम्मान रहे

कभी प्यार से, कभी डांटकर

बच्चों की गलती उन्हें बताते हैं

अज्ञानी को ज्ञान देकर

अलग नई पहचान देकर

गुरु राष्ट्र निर्माता कहलाते हैं

उसके पावन उपदेशों में

अनुभव की सदा तरंग बहे

अपने ज्ञान के वेग से

उपवन को पुष्पित करते हैं

उस गुरु को सादर प्रणाम करते हैं।।

 

डॉ. अनीता शाही सिंह

असिस्टेंट प्रोफेसर

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)

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