साहित्य

कारगिल विजय दिवस

डॉ. अनिता निधि 

गूँज उठा आकाश समूचा, भारत माँ के जयकारों से,

थर-थर काँपी बर्फ़ शिखरों पर, वीरों की हुंकारों से।

विषम दुर्गम ऊँची चोटी, जहाँ बर्फ़ का डेरा था,

वहाँ वीर बांकुरों ने जाकर, दुश्मन को आ घेरा था।

 

मातृभूमि की रक्षा हित, जिन्होंने निज प्राण लुटाए थे,

काट-काट कर हर बाधक को, विजय-ध्वज फहराए थे।

टोलोलिंग और टाइगर हिल पर, शौर्य गाथा लिखी गई,

वीर शहीदों के लहू से, अमर वो गाथा लिखी गई।

 

कोटि-कोटि नमन उन वीरों को, जिन्होंने इतिहास रचा,

जिनके कारण भारत माँ का, शीष सदा ऊँचा ही रहा।

कारगिल विजय दिवस यह हमको, त्याग-समर्पण सिखलाता,

हर भारतवासी गर्व से, वीरों के गुण गाता।

 

डॉ. अनिता निधि

जमशेदपुर, झारखंड

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