
गूँज उठा आकाश समूचा, भारत माँ के जयकारों से,
थर-थर काँपी बर्फ़ शिखरों पर, वीरों की हुंकारों से।
विषम दुर्गम ऊँची चोटी, जहाँ बर्फ़ का डेरा था,
वहाँ वीर बांकुरों ने जाकर, दुश्मन को आ घेरा था।
मातृभूमि की रक्षा हित, जिन्होंने निज प्राण लुटाए थे,
काट-काट कर हर बाधक को, विजय-ध्वज फहराए थे।
टोलोलिंग और टाइगर हिल पर, शौर्य गाथा लिखी गई,
वीर शहीदों के लहू से, अमर वो गाथा लिखी गई।
कोटि-कोटि नमन उन वीरों को, जिन्होंने इतिहास रचा,
जिनके कारण भारत माँ का, शीष सदा ऊँचा ही रहा।
कारगिल विजय दिवस यह हमको, त्याग-समर्पण सिखलाता,
हर भारतवासी गर्व से, वीरों के गुण गाता।
डॉ. अनिता निधि
जमशेदपुर, झारखंड




