
गुरु का वंदन कीजिए,महिमा अपरम्पार।
जासु कृपा से ही मिले,अमित ज्ञान भंडार।।
प्रथम गुरू मम मातु हैं, करती उन्हें प्रणाम।
सिखलाया था जिन्होंने,प्रथम जगत के काम।।
बिन गुरु कृपा लगे नहीं, भव से बेड़ा पार।
सद्गुरु की करिये सदा ,अर्चन शत-शत बार।।
सद्गुरु पूजा कीजिए,होते बड़े महान।
वह ही तो देते हमें,ऊँच-नीच का ज्ञान।।
बिन गुरु के मिलता नहीं,हमको कोई ज्ञान।
शिव गुरु होते जगत में,सबसे बड़े महान।।
गुरु चरणों में रति रहे,सदा लगायें ध्यान।
मिलता है गुरु कृपा से , हमें मान सम्मान।।
गुरु पूर्णिमा पर्व पर, गुरु से लें आशीष।
हाथ जोड़ वंदन करें,पाद झुकाकर शीश।।
जिससे भी मुझको मिला,थोड़ा सा भी ज्ञान।
वह भी मेरे गुरू हैं, करती हूं सम्मान।।
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पार्वती देवी’ ‘गौरा’देवरिया




