साहित्य समाचार

कवि इन्द्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’ के 57वें जन्मोत्सव पर सजा साहित्य का महाकुंभ, विद्या-वाचस्पति एवं विद्या-सागर सम्मान से विभूतियाँ अलंकृत

काशी हिन्दी विद्यापीठ में बाबा श्री कालभैरव अखिल भारतीय काव्य संगम एवं विशेष मानद सम्मान समारोह का भव्य आयोजन

वाराणसी। काशी नगरी में तेलियाबाग स्थित अथर्व फैमिली सभागार (एसी हॉल) में काशी हिन्दी विद्यापीठ एवं अखिल भारतीय लेखक कवि कलाकार परिषद् के तत्वावधान में कुलसचिव एवं संस्थापक कवि इन्द्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’ के 57वें जन्मदिवस के अवसर पर “बाबा श्री कालभैरव अखिल भारतीय काव्य संगम एवं सम्मान समारोह” तथा विद्या-वाचस्पति (पीएचडी समतुल्य) एवं विद्या-सागर (डी.लिट् समतुल्य) विशेष मानद सम्मान समारोह का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र (कवि सम्मेलन) के मुख्य अतिथि कवि संगम त्रिपाठी (जबलपुर) ने अपने उद्बोधन में कहा—
“बाबा श्री विश्वनाथ जी के कोतवाल बाबा कालभैरव नाथ अपने भक्तों का हर सुख-दुःख में साथ देते हैं। ऐसा सनातन धर्मावलम्बियों का अटूट विश्वास है।”
उन्होंने कहा कि पूर्ण आस्था एवं विश्वास के साथ सकारात्मक सोच और सार्थक पहल ही मानवता को सशक्त बना सकती है। प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह समाज में मानवतावादी मूल्यों के प्रति जन-जन को निरंतर जागरूक करता रहे।


कार्यक्रम की अध्यक्षता सागर (मध्य प्रदेश) के प्रख्यात कवि एवं पूर्व शिक्षा अधिकारी डॉ. महेन्द्र सिंह ‘गौर’ ने की। द्वितीय सत्र (सम्मान समारोह) के मुख्य अतिथि राष्ट्रवादी हिन्दू शक्ति वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता रहे। कार्यक्रम का प्रमुख संरक्षण काशी हिन्दी विद्यापीठ के प्रमुख संरक्षक डॉ. रामअवतार पाण्डेय (एडवोकेट) ने किया।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड के प्रख्यात शिक्षाविद् एवं कवि डॉ. राधेश्याम तिवारी को “विद्या-सागर”, जबकि डॉ. महेन्द्र सिंह ‘गौर’ एवं सोमदेव (वाराणसी) को “विद्या-वाचस्पति” विशेष मानद सम्मान से अलंकृत किया गया।
स्वागत भाषण देते हुए कवि इन्द्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’ ने कहा कि काशी हिन्दी विद्यापीठ मानव हित में कार्य करने वाले विभिन्न क्षेत्रों के व्यक्तित्वों को निरंतर सम्मानित एवं प्रोत्साहित करता रहा है। मंचीय एवं ऑनलाइन कार्यक्रमों के माध्यम से देश-विदेश के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों को जोड़ने का यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।
कार्यक्रम में गंगा सहाय पाण्डेय, सार्जेंट अभिमन्यु पाण्डेय ‘मनु’, डॉ. शिवनाथ सिंह ‘शिव’, डॉ. ओमप्रकाश पाण्डेय ‘निर्भय’, मनोज द्विवेदी ‘जमालपुरी’, अशोक श्रीवास्तव ‘भुलक्कड़ बनारसी’, संतोष कुमार प्रीत, राजेन्द्र तिवारी ‘स्वदेश’, विजय कुमार गुप्ता सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार एवं काव्य-पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन डॉ. बुद्धदेव तिवारी तथा डॉ. शिवप्रकाश साहित्य ने किया।
इस अवसर पर अजय शुक्ला (नोएडा) के संपादन में प्रकाशित साहित्यिक साझा काव्य-संग्रह “गंगाजंलि” का लोकार्पण भी किया गया। संग्रह में कवि संगम त्रिपाठी, श्याम फतनपुरी, पंकज बुरहानपुरी एवं डॉ. सोमनाथ शुक्ल की रचनाएँ शामिल हैं।
कवि इन्द्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’ तथा उत्तर प्रदेश संयुक्त राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रादेशिक वरिष्ठ पदाधिकारी प्रकाश श्रीवास्तव के जन्मदिवस पर उन्हें अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान मंचीय एवं ऑनलाइन माध्यम से 108 साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं समाजसेवियों को “बाबा श्री कालभैरव सम्मान-2026” प्रदान किया गया। सम्मान कर्नल डॉ. आदि शंकर मिश्र, डॉ. रामअवतार पाण्डेय, गंगा सहाय पाण्डेय, प्रकाश कुमार श्रीवास्तव ‘गणेश’, कुलाधिपति कवि सुखमंगल सिंह ‘मंगल’, कुलपति डॉ. संभाजी राजाराम बाविस्कर, डॉ. प्रमोद वाचस्पति, डॉ. ओमप्रकाश द्विवेदी ‘ओम’, कवि नन्दलालमणि त्रिपाठी ‘पीताम्बर’ तथा अंतरराष्ट्रीय पार्श्व लोक कलाकार ललित सिंह ठाकुर द्वारा प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का शुभारम्भ डॉ. चंद्रकांत मिश्र (प्रयागराज) द्वारा वाणी वंदना तथा लोक गायिका संगीता सिंह द्वारा बाबा श्री कालभैरव वंदना से हुआ। इसके उपरांत आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में सार्जेंट अभिमन्यु पाण्डेय ‘मनु’, मनोज द्विवेदी ‘जमालपुरी’, अशोक श्रीवास्तव ‘भुलक्कड़ बनारसी’, डॉ. शिवनाथ सिंह ‘शिव’, सुषमा जौनपुरी, डॉ. सुमति श्रीवास्तव, संगीता श्रीवास्तव, अंशिका श्रीवास्तव, अजय वर्मा, सोमदेव, इन्द्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’, बुद्धदेव तिवारी, अमित शर्मा, संतोष कुमार प्रीत, राजेन्द्र प्रसाद तिवारी ‘स्वदेश’, पाण्डेय चिदानन्द ‘चिद्रूप’, राकेश चौबे ‘संगम’, डॉ. सत्येन्द्र उपाध्याय, डॉ. राजकुमार ‘आशीर्वाद’ एवं पवन कुमार सिंह (एडवोकेट) सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया।
स्वागत संयोजन अमित शर्मा ‘अमित’ ने किया, जबकि कार्यक्रम के अंत में सार्जेंट अभिमन्यु पाण्डेय ‘मनु’ एवं डॉ. ओमप्रकाश पाण्डेय ‘निर्भय’ ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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