
माँ की बाँहों में मिलता, जग का सबसे प्यारा घर,
उसके आँचल की छाया में, हर दुख जाता है बिखर।
माथे पर स्नेहिल चुम्बन, जैसे ईश्वर का आशीष,
ममता की उस गर्माहट से, खिल उठता जीवन-बीज।
थक जाए जब मन दुनिया से, माँ बनती है आस,
उसकी गोदी में मिल जाता, हर पीड़ा का विश्वास।
बिन बोले ही पढ़ लेती है, आँखों की हर बात,
माँ के जैसा कौन समझे, मन के गहरे जज़्बात।
ममता का यह पावन रिश्ता, सबसे सुंदर प्यार,
जिसमें बस अपनापन ही है, नहीं किसी का भार।
माँ के चरणों में बसता है, सारा जग का मान,
उसके प्रेम से रोशन रहता, जीवन का हर विहान।
स्वरचित
डाॅ. अनिता निधि
जमशेदपुर, झारखंड



