
मातृभूमि में होता मार्मिक शक्ति
कई जाती धर्मों की अपार भक्ति
भिन्नत्व में एकत्व का महान शक्ति
सब केलिए आवश्यक देश भक्ति।
मातृभूमि से मिला है पदार्थ
बहू मूल्य संपदा है यदार्थ
इसको बचाना है निस्वार्थ
हम को मिला है परमार्थ।
मातृभूमि पर होता मंदिर
प्रभू केलिए जाता अंदर
लोक पूजा करता प्यार
इसे मिला भक्ति अपार।
नदियां बहती निरंतर निर्मल
पेड़ पौधों देता है परिमल
प्रकृति शोभा बढ़ता बेमिसाल
स्वच्छ पर्यावरण बदलता सरल।
मातृभूमि हमारेलिए कर्मभूमि
मातृभूमि हमारेलिए शक्तिभूमि
मातृभूमि हमारेलिए स्वर्ग भूमि
मातृभूमि हमारेलिए पुण्यभूमि
इसे मातृभूमि का सम्मान करना।
श्रीनिवास एन, आंध्रप्रदेश
साहित्यकार




