मेरे मन के अनुरागी प्राण प्रिये तुम आ जान
जब जब मैं तुम्हें पुकारू आलिंगन में भर जाना
चाह में तेरे आंगन की बड़भागी बन जाऊं मैं
प्रेम पथिक हूं मैं तेरी पग पग फूल बिछाऊं मै
सात जन्म का नहीं मैं जन्मों तक साथ निभाऊंगी
अपने नैनो के आंसुओं से तुमको जलपान कराऊंगी
हर बार तुम ही बन जाना मेरे जीवन के साथी
पत्थर भी गाथा गाएंगे इस प्रेम पुजारन नारी का
प्यार हमारा कम ना होगा उखड़ीं हुई सांसों में
तेरे आने के इंतजार में चौखट पे दिया जलाएंगे
ममता की क़लम से ✍️ ✍️ बाराबंकी




