
भरा पूरा परिवार था बेचैन
कहाँ से कैसे मिलेगा,
“ओ” पॉजिटिव चाहिये था
की खबर व्हाट्सप्प पर।
आया अचानक एक फोन
सीधा पूछा कब आऊँ मैं,
चाहिये तुम्हें “ओ” पॉजिटिव
करना चाहता हूँ रक्तदान मैं।
नववर्ष की खुशियों सा
बहारें आयी बसंत सी,
खुशियों से मन खुश
जल्दी बताया पता हमने।
स्वस्थ सुन्दर राजकुमार
मन के धनी सुकुमार,
आये बताये पते पर
कर गये वो रक्तदान।
जोड़ हाथ खड़े हम
मानवता से हुये नतमस्तक,
बताया उन्होंने खो चुके पापा
रक्तदान नहीं किया,किसी ने।
चार मुख्य समूह होते रक्त के
ए,बी, एबी, और ओ,
एक-एक बूंद है कीमती
जान बचाता मानव की।
लो संकल्प सभी यह
जरूरत हो किसी को, दो
करो रक्तदान-महादान
मानव जीवन को बचाओ।
स्वरचित
डॉ. प्रभा जैन “श्री ”
देहरादून




