
सावन के खूबसूरत नजारे,,,
रिमझिम बरस रहा है ये सावन,
भक्तिमय हो गया मेरा तन मन।
शिव नाम की धुन गूंज रही,
हर बूंद गंगाजल बन रही।
हरे भरे वृक्षों से धरा सज गई,
कलियां उपवन में महक गई।
बेलपत्र शिव पर चढ़ने लगे हैं,
ओम नमः शिवाय कहने लगे हैं।
डमरू की ध्वनि बजने लगी है,
कांवड़ियों से राहें सजने लगी है।
बादल शिव चरणों में शीश झुकाए,
बिजली आरती का दीपक बन जाए।
श्रद्धा की निर्मल गंगा में नहा कर,
सावन की बारिश का आनंद उठाकर।
शिव की कृपा करुणा बरसती रहे,
शिव की भक्ति हृदय में बसती रहे।
सौ, भावना मोहन विधानी ✍️
अमरावती महाराष्ट्र।




