साहित्य

सावन मनभावन शिव उपासना

डा० कर्नल आदि

सावन मनभावन मधुमास आ गया,

शिव जी का उपवास आ गया,

शिव की महिमा शिव ही जाने,

शास्त्र रचित शिव तत्व को जाने।

 

श्रद्धा भक्ति का सावन मनभावन

आत्म तत्व का पूजन शिव है,

शिव ही तत्व है, शिव ही ब्रह्म है,

शिव परमेश्वर, शिव ही सत्य है।

 

श्रवण नक्षत्र में यह संक्रान्ति,

शिव श्रावण की यह संक्रांति।

शिव शंकर की मन भावन है,

शिव श्रावण में यही सुहावन है।

 

आषाढ़ के सूरज की गर्मी जब,

जग में धीरे धीरे कम हो जाती।

सावन मनभावन मधुमास है आता,

और सावन में वर्षा ऋतु आती।

 

मृत प्राय सब जीवन जगता,

प्रकृति में हरियाली छाती।

नव संचार श्रावण में आता,

नई उमंग जीवन में आती ।

 

अनुशासन में अति कठोर शिव,

अनुशासित से हों प्रसन्न शिव,

जीवन-आनंद सदा देते शिव,

सावन मनभावन सांब सदाशिव।

 

भक़्ति भाव आधीन हैं शंकर,

भक्तों के खुद भक्त हैं शंकर।

बाघाम्बर ओढ़ें त्रिशूल धर,

जटा में गंग सम्भाले शंकर।

 

सावन में मनभावन रुद्राभिषेक,

शिव जी का शृंगार करें हम,

भक्ति भाव से पूजन करके,

सोमवार का वृत रखें हम।

 

शिव का सावन मनभावन है,

आदित्य कहें जोड़ दोऊ कर

शिव की महिमा शिव ही जाने,

शिव ही सत्य हैं, शिव ही सुंदर।

 

डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र

‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’

‘विद्यासागर’, लखनऊ

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