
साहित्य गगन के देदिप्यमान नक्षत्र, उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद महान।
31 जुलाई 1880 में जन्मे लम्हे- बनारस -उत्तर प्रदेश जन्म स्थान।
पिता अजायबराय श्रीवास्तव -माता आनंदी देवी के पुत्र धनपत राय- प्रेमचंद मुंशी चौथी संतान ।
बचपन में मौलवी से सीखी उर्दू- फारसी ,फिर हिंदी के हुए कद्रदान।
चाचा ने नाम दिया नवाबराय ,”सोजे वतन “सृजन से मिला सम्मान।
कहानीकार ,उपन्यासकार, साहित्यकार निबंध ,नाटक लिखे, चला लेखन अभियान ।
अमीरों द्वारा गरीबों का शोषण का चित्रण, स्त्री जीवन के कलमकार महान ।
मानवीय भावनाएं, संवेदनाओं का चित्रण किया पाया सम्मान।
कुशल वक्ता ,सुधि संपादक, किसान जीवन चित्रण से पाया मान।
उनका यथार्थवादी चित्रण की प्रासंगिकता ,कल थी आज है वे थे महान।
सन 1935 में हंस पत्रिका के बने संपादक, 1936 में किया गोदान प्रकाशन, मिला अनंत सम्मान।
कहानी- पंच परमेश्वर ,बुधिया ,बूढ़ी काकी ,नमक का दरोगा ,जेवर का डिब्बा ,बड़े घर की बेटी, ईदगाह से किया सुधार का आव्हान ।
गोदान ,गबन ,रंगभूमि ,कर्मभूमि निर्मला ,सेवा सदन ,शतरंज के खिलाड़ी लिखे उपन्यास पाया सम्मान।
रंगभूमि उपन्यास पर मिला मंगल प्रसाद सम्मान ।
16 जून 1936 में गरीबी और बीमारी में हुआ स्वर्ग लोक गमन, अमर रहेगे मुंशी प्रेमचंद महान।
जन्मदिवस जयंती पर कोटि-कोटि नमन, अर्पित श्रद्धा सुमन, मुंशी प्रेमचंद साहित्यकार थे महान ।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश
रचना स्वरचित और मौलिक है




