
तुम्हीं से रंग दुनिया के तुम्हीं से ये बहारें है,
फ़लक पर जो चमकते हैं तुम्हीं से ये सितारे है।
तुम्हारी इक नज़र से ही महक उठता है ये गुलशन,
तुम्हीं से रोशनी में ढल आए उजले ये नज़ारे हैं।
अंधेरी राह में तुम रोशनी बनकर उतर आए,
हमारी डूबती कश्ती के तुम्हीं तो किनारे हैं।
तपिश में जिंदगी की तुम ढली शबनम की सूरत हो,
हमारे दिल के वीराने में बहते पाकीज़ा धारे हैं।
तुम्हीं से दिल में धड़कन है, तुम से सांँस चलती है,
हमारी जिंदगी के अब तुम्हारे ही सहारे हैं।
न कोई तमन्ना अब, न कोई जुस्तजू दिल में,
तुम्हें पाकर लगा हम पर खुदा के फज़ल सारे हैं।
तुझ पे “आकाश” ने अपने सभी अरमाँ वारे हैं,
अब हमारी जीस्त के मालिक तुम्हारे ही इशारे हैं।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश




