
इठलाती बलखाती उड़ती
पुष्प पुष्प पर तितली रानी,
देख पुष्प भी तितली को
मचल मचल जाता।
कोमल चमकदार पंख देख
बच्चे भागते पीछे पीछे,
रंगबिरंगे पुष्पों को देख
तितली अपने को रोक ना पाती।
एक-एक फूल से दूजे तक
ऊपर नीचे करती सैर,
मानो वन उपवन में
आई सैर करने कोई परी।
लेती खुशबू मिलती सब से
दोस्ती सभी से निभाती,
बगीचा भी दोस्ती निभाता
तभी पुष्प देता सुन्दर सुगंधित खुशबू उपहार।
तितली रानी तितली रानी
तुम हो कितनी सुन्दर,
छिप के फूलों में देखता भंवरा
होकर दीवाना, पलकें ना झपकाता।
देती यह संदेश जैसे
खिलखिलाओ तुम सब,
मुस्कुराओ तुम सब
सुन्दर सुंदर विचार लाओ।
जग मैं ना हो कोई तुमसे दुःखी
सबके हित तुम आ जाओ,
जीओ और जीने दो की भावना रख
खुश होकर खुशियाँ लुटाओ.
स्वरचित
डॉ. प्रभा जैन “श्री ”
देहरादून



